सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना
कदम यकीन में मंजिल गुमान में रखना
चमकते चाँद सितारों का क्या भरोसा है ?
ज़मी की धूल भी अपनी उड़ान में रखना
वो एक ख्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता
बना के चाँद उसे आसमान में रखना
सवाल तो बिना मेहनत के हल नहीं होते
नसीब को भी मगर इम्तेहान में रखना
कदम यकीन में मंजिल गुमान में रखना
चमकते चाँद सितारों का क्या भरोसा है ?
ज़मी की धूल भी अपनी उड़ान में रखना
वो एक ख्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता
बना के चाँद उसे आसमान में रखना
सवाल तो बिना मेहनत के हल नहीं होते
नसीब को भी मगर इम्तेहान में रखना
waah....waah....sir maar hi daala
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