Monday, 26 August 2013

सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना.....

सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना
कदम यकीन में मंजिल गुमान में रखना

चमकते चाँद सितारों का क्या भरोसा है ?
ज़मी की धूल  भी अपनी  उड़ान में रखना

वो एक ख्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता
बना के चाँद उसे आसमान में रखना

सवाल तो बिना मेहनत के हल नहीं  होते
नसीब को भी मगर इम्तेहान में रखना 

Tuesday, 1 January 2013

है नक़्शे-कफे-पा में


है नक़्शे-कफे-पा में वो अंदाज़ गज़ब के 
आंधी भी गुज़रती है तेरी राह से दब के 
सोते नहीं इस वहम से वो बिस्तरे-गुल पे 
डाले ताने नाज़ुक पे निशाँ फूल ने दब के 

2 lines

रात  कजरायी झमेले खो गए
शाम होते ही अकेले हो गए



कहू कुछ उनसे मगर ये ख्याल होता है
शिकायतों का नतीजा मलाल होता है